किशोरावस्था – इन बातों पर ध्यान देना जरूरी

 

जिंदगी  इंजॉय करना  और  जिंदगी  बर्बाद  करने  में  बहुत ही  मामूली  सा  फर्क  होता  है  , कुछ  लोग  मौज  मस्ती  व आवारगी  को  ही  स्वर्ग  समझते  हैं  पर  दुनिया  की  नजर में  यह  नर्क  होता  है  ।                                                          किशोरावस्था  में  आमतौर  पर  लड़के लड़कियां  हकीकत  से  ज्यादा  कल्पनाओं  में  जी  रहे  होते हैं ।  किशोर  बच्चों  में  उम्र  के  साथ  काफी  बदलाव  आते हैं  जिन्हें  वे  स्वीकार  नहीं  कर  पाते  किसी  से  कुछ  कहने  में  हिचक  होती  है  लगता  है  कि  सामने  वाला  क्या  सोचेगा  । माता- पिता  का  किसी  बात  को  लेकर रोकना  टोकना  उन्हें  अपनी  आजादी  छीनने  जैसा  लगता है  यही  वह  उम्र  होती  है  जब  किशोर  मानसिक भावनात्मक  और  बौद्धिक  विकास  की  प्रक्रिया  की  गति पकड़ते  हैं  मन  किसी  एक  बात  पर  नहीं  ठहर  पाता दिमाग  में  सवालों  का  अंबार  लगा  रहता  है  ,कब  – कहां क्यों  कैसे  सवाल  जन्म  लेने  लगते  हैं  अपनी  आजादी पर  उन्हें  थोड़ा  सा  भी  प्रतिबंध  बाधक  लगने  लगता  है माता- पिता  का  आदेश  उन्हें  चुनौती  सा  लगता  है  ।                         आजकल  किशोरों  के  लिए  गर्लफ्रेंड  या बॉयफ्रेंड  होना  है  स्टेटस  सिंबल  बनता  जा  रहा  है  इस कोमल  उम्र  में  लड़के – लड़कियों  को  किसी  प्रकार  का आघात  न  पहुंचे  इसके  लिए  माता -पिता  और  शिक्षकों को  भी  समझदारी  से  काम  लेना  चाहिए  और  शांत  मन से  कार्य  व  अच्छे  भविष्य  की  अहमियत  को  समझाना चाहिए  ।                                                                 इन  बातों  पर  ध्यान  देना  जरूरी  –     

     *   बच्चों  के  अंदर  छिपी  भावनाओं  को  ना  समझ कर  अक्सर  माता- पिता  उन  पर  चिल्ला पड़ते  हैं  जो सही  नहीं  है  जब  आपका  बच्चा  आपसे  कहता  है  कि आप  कौन  सा  उससे  अच्छी  तरह  बात  करते  हैं  तो उससे  यही  साबित  होता  है  कि  आप  अपने  बच्चे  पर भरोसा  नहीं  करते  बच्चे  के  शब्दों  का  मतलब  समझने की  कोशिश  करें  क्योंकि  बहुत  से  माता- पिता  ऐसे  होते हैं  जो  बच्चों  की  परेशानी  को  ना  समझ  कर  उन  पर शंका  करने  लगते  हैं  ।                                                  *  अगर  आपको  लगता  है  कि  आपका  बच्चा  आपसे  बात  करने  से  कतराता  है  लेकिन  दोस्तों  के  साथ  वह  ज्यादा  वक्त  बिताता  है  तो  उसके  मन  की  बात  जानने के  लिए  आपको  ही  पहल  करनी  पड़ेगी  इसके  लिए आप  उसके  साथ  ज्यादा  समय  बिताएं  उसके  साथ उसकी  पसंद  के  गेम  वगैरह  खेलें  और  उसकी  पसंद  के कुछ  दिलचस्प  काम  करें  जो  उसे  अच्छा  लगे,  इस  तरह बच्चा  आसानी  से  अपने  दिल  की  बात   आपसे  शेयर  कर  पाएगा    ।                                                  * बच्चों  से  दिल  खोल  कर  बात  करना नही करता ।  बच्चो  से  माता- पिता  को  अपनी  बात  करने  का  लहजा  बदलना चाहिए  क्योंकि  अब  बच्चे  छोटे  नहीं  रहे,  यह  समझना  भी  माता- पिता  के  लिए  निहायत  जरूरी  है  बच्चों  से क्रोध  में  नहीं  बल्कि  शांति  से  बात  करनी  चाहिए  ताकि उन्हें  अपने  माता -पिता  पर  भरोसा  हो  और  वह  बिना संकोच  के  अपनी  बात  उनसे  कर  सकें ।                                                                                  *    माता  पिता  अपने  बच्चों  की  हर  हरकत  पर  नजर रखें  ,चाहे  वह  पढ़ाई  से  जुड़ी  हो  या  उनकी  अपनी निजी  जिंदगी  से  माता- पिता  की  जिम्मेदारी  है  कि  वह बच्चों  की  रोजमर्रा  की  बातों  पर  नजर  रखें     ।      *    अगर  बच्चे  अपने  माता- पिता  से  अपने  मन  की बात  ना  बता  पाए  तो  माता -पिता  को  चाहिए  कि  वे उनके  दोस्त  बनकर  उनसे  बातें  करें  और  उनके  मन  में क्या  चल  रहा  है  यह  जानने  की  कोशिश  करें  साथ  ही  उसके    दोस्तों  से  भी मिले  , बीच- बीच  में  उन्हें  अपने  घर  बुलाए , इससे  बच्चे का  झुकाव  अपने  पेरेंट्स  की  तरफ  होगा  और  वह  बिना  पूछे  अपने  मन  की  बात  उनसे  शेयर  करेगा  ।   

     *  माता  पिता  और  शिक्षकों  को  भी  चाहिए  कि  बच्चो  की  काउंसलिंग  इस  तरह  करें  कि  उन्हें  यह  न  लगे  कि  हम  ही  गलत  है  बच्चों  को  प्यार  से  समझाएं ताकि  वह  समझ  सके  कि  जिस  राह  पर  चल  रहे  हैं उनके  लिए  सही  है  या  नहीं  अभी  उन्हें  पढ़ाई  करनी  है और  अपने  करियर  के  बारे  में  सोचना  है  ना  कि  और चीजों  में  समय  बर्बाद  करना  है  और  गलत  काम  पडकर  वे  अपना  भविष्य  बर्बाद  कर  रहे  हैं ।  मां- बाप  की  ज्यादा  सख्ती  किशोरों  को  जिद्दी  वह  उदंड  बना  सकती  है   ।           

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