बच्चों के लिए खतरनाक है डिजिटल नशा

आज  के  बच्चे  मोबाइल  लेकर  पैदा  होते  हैं । पहले  बच्चे  मिट्टी  से  खेलते  थे,  अब  टचस्क्रीन  से । ये  बदलाव  बुरा  नहीं  है,  पर  जब  मोबाइल “जरूरत”  से  “नशा”  बन  जाए,  तब  खतरे  की  घंटी  बज  जाती  है ।  इसे  ही  कहते  हैं  डिजिटल  नशा।
*डिजिटल  नशा  क्या  है ?*
जब  बच्चा  बिना  वजह  फोन  उठाए , हर  2  मिनट  में  नोटिफिकेशन  चेक  करे,  खाना- पीना-नींद  छोड़कर  गेम/ रील  में  डूबा  रहे , और  फोन छीनो  तो  चिल्लाए- रोए –  समझ  जाइए  वो डिजिटल  नशे  का  शिकार  हो  गया  है ।  शराब  की  तरह  ये  भी  धीरे- धीरे  अंदर  तक  खोखला करता  है ।
*बच्चों  को  कैसे  नुकसान  पहुंचाता  है ?*
1. * दिमाग  की  बर्बादी *:  रील  और  गेम  हर  15  सेकंड  में  नया  कंटेंट  देते  हैं ।  बच्चे का  दिमाग  “तुरंत  मजा”  का  आदी  हो  जाता  है ।  फिर  क्लास  की  40  मिनट  की पढ़ाई  उसे  पहाड़  लगती  है ।  एकाग्रता खत्म,  याददाश्त  कमजोर ।
2. * सेहत  का  सत्यानाश *:  रातभर  फोन = नींद  खराब । नींद  खराब  =  चिड़चिड़ापन, मोटापा,  आंखों  पर .चश्मा,  सिरदर्द।  पीठ झुककर  बैठने  से  रीढ़  की  हड्डी  भी  टेढ़ी  हो  रही  है ।
3. *रिश्ते  ठंडे  पड़  रहे *:  बच्चा  कमरे  में, मम्मी  किचन  में,  पापा  टीवी  पर ।  सब  एक  घर  में  पर  कोई  किसी  से  बात  नहीं करता ।  पहले बच्चे  मां  से  दिनभर  की  बात  शेयर  करते  थे,  अब  यूट्यूब  को  बताते  हैं ।
4. * सोशल  स्किल  खत्म*:  असली  दोस्त बनाने  की  बजाय  बच्चा  PUBG  के  दोस्त बनाता  है ।  आंख  मिलाकर  बात  करना,  हार- जीत  सहना,  गुस्सा  कंट्रोल  करना –  ये सब  वो  स्क्रीन  से  नहीं  सीखेगा ।
*अब  उपाय  क्या  है ?  मना  नहीं, .मैनेज करो*
डांट- मार  से  बच्चा  फोन  छुपाकर  देखेगा । दोस्त  बनकर  रास्ता  दिखाइये ।
 1. * टाइम  फिक्स  करे  *:   रोज  45  मिनट स्क्रीन  टाइम । टाइमर  लगा  दो ।  टाइम  खत्म  होते  ही  फोन  बिना  झगड़े  ले  लो । बच्चे  को  बाउंड्री  समझ  आएगी ।
2. *बदलाव  दो,  छीनो  मत*:  फोन  लिया तो  बदले  में  साइकिल,  क्रिकेट,  पेंटिंग,  मिट्टी  दो । दिमाग  को  मजा  चाहिए ।  आप सोर्स  बदल  दो ।
3. *खुद  उदाहरण  बने *:  बच्चा  वही सीखेगा  जो  आप  करोगे ।  खाने  की  टेबल “नो  फोन  जोन”  बना  दो।  20  मिनट  सब एक- दूसरे  से  बात  करो ।
4. *बाहर  निकालो *:  हफ्ते  में  3  दिन  पार्क,  गार्डन,  खेल  का  मैदान ।  धूप  और मिट्टी  बच्चे  की  सबसे  बड़ी  दवा  है ।
मोबाइल  बुरा  नहीं  है ।  बुरा  है  कंट्रोल  खो देना ।  मोबाइल  बच्चे  के  हाथ  में  खिलौना होना  चाहिए,  मालिक  नहीं ।  याद  रखें  – जो  बच्चा  आज  स्क्रीन  से  लड़  रहा  है,  कल  वही  देश  संभालेगा ।  उसकी  आंखें मोबाइल  की  रोशनी  से  नहीं,  सपनों  की चमक  से  चमकनी  चाहिए ।
डिजिटल  नशे  को  हराना  है  तो  प्यार + अनुशासन  का  कॉम्बो  चलाओ ।  बच्चा सुधर  जाएगा,  बस  हमें  पहले  सुधरना  होगा ।

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सोशल मीडिया की भूमिका

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